पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। कतर के हवाई क्षेत्र में पहली बार ईरान और कतर के लड़ाकू विमानों के बीच सीधी भिड़ंत हुई है, वहीं रूस ने ईरान के एकमात्र परिचालन परमाणु संयंत्र ‘बुशहर’ की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चेतावनी जारी की है। इस युद्ध का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, विशेषकर भारत के ऊर्जा क्षेत्र पर दिखने लगा है।
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने पुष्टि की है कि ईरानी लड़ाकू विमानों के दोहा की ओर बढ़ने के बाद कतरी जेट विमानों को हवा में भेजा गया (scramble)। चेतावनी के बावजूद ईरानी विमानों के पीछे न हटने पर उन पर फायरिंग की गई। कतर ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए कहा है कि ‘हमाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी, जिसे नाकाम कर दिया गया है। फिलहाल कतर का ईरान से कोई संपर्क नहीं है।
रूस की परमाणु एजेंसी ‘रोसाटॉम’ (Rosatom) ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी और इजरायली हमलों के चलते बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र को गंभीर खतरा है। सुरक्षा कारणों से रूस ने करीब 100 कर्मियों को वहां से निकाल लिया है। वहीं, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने आगाह किया है कि ईरान पर इन हमलों से क्षेत्र में परमाणु हथियारों की होड़ मच सकती है।
यूएई (UAE): संयुक्त अरब अमीरात ने बताया है कि ईरान से 186 मिसाइलें और 812 ड्रोन दागे गए। हालांकि अधिकांश को इंटरसेप्ट कर लिया गया, लेकिन हमलों में 3 लोगों की मौत हुई है और 68 घायल हुए हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इन हमलों को “पागलपन” करार देते हुए यूएई के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
बहरीन : बहरीन ने दावा किया है कि उसने अब तक 73 ईरानी मिसाइलों और 91 ड्रोनों को मार गिराया है।
लेबनान: इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में हिजबुल्लाह के नेतृत्व को निशाना बनाकर बिना चेतावनी के भीषण हवाई हमले किए हैं। साथ ही, इजरायल ने लेबनान सीमा के भीतर एक ‘बफर जोन’ बनाने का ऐलान किया है।
कतर द्वारा एलएनजी (LNG) उत्पादन रोकने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति ठप हो गई है।
भारत: दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एलएनजी खरीदार भारत अब भारी संकट में है। पेट्रोनेट एलएनजी ने गेल (GAIL) और अन्य मार्केटिंग कंपनियों को आपूर्ति में कटौती की सूचना दी है। यूरोप में गैस की कीमतें 30% तक बढ़ गई हैं।
इंडोनेशिया: मिडिल ईस्ट से आपूर्ति रुकने के बाद इंडोनेशिया ने अपनी तेल जरूरतों के लिए अमेरिका की ओर रुख किया है और 15 अरब डॉलर के ऊर्जा सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं।